देहरादून, 27 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में इस समय मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां राज्य के मैदानी जिलों में प्रचंड गर्मी और लू (हिटवेव) ने आम जनजीवन को बेहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही और तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया है।
इस बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने मैदानी इलाकों के लिए भी राहत की खबर दी है। 28 मई से देश भर में मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है, जिससे आगामी तीन से पांच दिनों के भीतर उत्तराखंड के मैदानी हिस्सों में भी बारिश होने की उम्मीद है।
राज्य के मैदानी हिस्सों में मंगलवार सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का दौर शुरू हो गया था। दोपहर के समय भीषण तपिश के कारण बाजारों और मुख्य सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि, दोपहर ढलने के बाद हवाओं का रुख बदलने से देहरादून का अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 38.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक है।
हरिद्वार और रुड़की में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जिससे स्थानीय लोग दिनभर उमस और तपिश से परेशान रहे।
मैदानी क्षेत्रों के विपरीत, राज्य के पहाड़ी इलाकों में मंगलवार दोपहर बाद अचानक मौसम का रुख बदल गया। सुबह खिली धूप के बाद आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल दिया। चमोली और बद्रीनाथ में तेज हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। वहीं, उच्च हिमालयी क्षेत्रों, मुनस्यारी और बागेश्वर में अच्छी बारिश होने से तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
पिछले 24 घंटों में पिथौरागढ़ में 17.4 एमएम, डीडीहाट में 8 एमएम, बेरीनाग में 2 एमएम और गरूड़ में 1.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। नई टिहरी में अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम यानी 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, बुधवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और गर्जना होने की संभावना है। राज्य के शेष जिलों में फिलहाल मौसम शुष्क बना रहेगा।
अगले एक-दो दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई विशेष कमी नहीं आएगी, लेकिन इसके बाद तीन से पांच दिनों के भीतर पारे में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मैदानों में झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलेगी।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय पूरा देश भीषण गर्मी की चपेट में है, लेकिन 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय होने जा रहा है। इस सिस्टम के असर से मैदानी इलाकों में हवाओं का रुख बदलेगा और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान नीचे आएगा।









