देहरादून, 23 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।
UTU Paper Leak : उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) से संबद्ध शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परीक्षा की गोपनीयता भंग होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए दो महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं निरस्त कर दी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यूटीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल ने बताया कि शिवालिक कॉलेज में ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ विषय का पर्चा लीक होने की लिखित शिकायत मिली थी। कुलपति के सख्त निर्देशों पर बनाई गई जांच समिति और संस्थान की आंतरिक पड़ताल में लीक की पुष्टि हुई।
जांच में सामने आया कि बाह्य प्रश्नपत्र निर्माता आशीष कुमार गुप्ता ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही पर्चे को छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप्स और ऑनलाइन पोर्टल पर शेयर कर दिया था। विवि प्रशासन ने आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से अगले सात वर्षों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
पड़ताल के दौरान केवल एक ही विषय नहीं, बल्कि ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक FIELD थ्योरी’ विषय का पर्चा भी परीक्षा से पहले बाहर आने और गोपनीयता भंग होने की मजबूत आशंका जताई गई। छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की शुचिता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने इन दोनों ही विषयों के प्रश्नपत्रों को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने का फरमान जारी किया।
निरस्त की गई दोनों विषयों की पुनर्परीक्षा अब अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नई डेटशीट और संशोधित परीक्षा केंद्रों की पूरी सूची जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी।
निगरानी में गंभीर लापरवाही बरतने को लेकर विश्वविद्यालय ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग प्रबंधन को भी सख्त चेतावनी जारी की है। विवि ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य के विभिन्न तकनीकी संस्थानों की साख पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज भीमताल, तुलाज इंस्टीट्यूट देहरादून, बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान द्वाराहाट और रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से शामिल हैं।
इसके अलावा शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग देहरादून, जयराम भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून, माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून और बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून की व्यवस्थाओं पर भी नजर रखी जा रही है।
टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी टिहरी, नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़, वूमेंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून और इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोपेश्वर जैसे दूरस्थ परिसरों में भी पारदर्शी परीक्षा संचालन को लेकर विश्वविद्यालय सतर्क है।
दूसरी तरफ, देशभर में जारी नीट पेपर लीक विवाद को लेकर उत्तराखंड का राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे युवाओं पर पुलिस लाठीचार्ज और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की घटना के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्यभर में मोर्चा खोल दिया।
गढ़वाल से लेकर कुमाऊं मंडल तक के सभी मैदानी और पर्वतीय जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। दून में महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी के नेतृत्व में विशाल रैली निकाली गई और केंद्र सरकार का पुतला दहन किया गया।
विकासनगर में पूर्व मंत्री नवप्रभात के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर निशाना साधा। हरिद्वार में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक साथ मिलकर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के आवास की तरफ कूच कर घेराव करने की कोशिश की।
कोटद्वार में पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ, जबकि पौड़ी में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और कीर्तिनगर में भी कांग्रेसियों ने चक्का जाम कर आक्रोश जताया। रुद्रपुर और किच्छा में विधायक तिलकराज बेहड़ ने साफ शब्दों में प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की।
उत्तरकाशी जिले में स्थिति बेहद गरमाई नजर आई, जहां दिल्ली में छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में युवा और छात्र सीधे सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित युवाओं के इस विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) सहित विभिन्न सामाजिक और स्थानीय संगठनों ने अपना पूर्ण समर्थन देते हुए लड़ाई को आर-पार की जंग बनाने का ऐलान किया।









