देहरादून, 27 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
UTU Paper Leak : उत्तराखंड तकनीकी विवि (यूटीयू) प्रशासन ने बीटेक पेपर लीक मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए परीक्षा नियंत्रक वीके पटेल को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। विवि की पूरी परीक्षा प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई थी। छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा था। प्रशासन ने बढ़ते दबाव के बीच यह सख्त कदम उठाया है।
दीपक कुमार को अब परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। नई जिम्मेदारी मिलते ही उन पर आगामी परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने का भारी दबाव आ गया है। विवि के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें जल्द से जल्द नई परीक्षा तिथियां घोषित करने के निर्देश दिए हैं।
पेपर लीक के मुख्य आरोपी सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष के खिलाफ शनिवार को विवि ने अपना सबसे कड़ा फैसला सुनाया। उन पर आजीवन किसी भी संस्थान में शिक्षण कार्य करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश उनके अकादमिक करियर को पूरी तरह खत्म कर चुका है। शिक्षा जगत में इस फैसले की गंभीरता पर लगातार चर्चा हो रही है।
आरोपी डॉ. आशीष को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस रिमांड के दौरान उनसे कई अहम राज उगलवाए गए। उनके मोबाइल और लैपटॉप से प्रश्नपत्रों के वितरण से जुड़े डिजिटल सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं।
लीक हुए प्रश्नपत्र बीटेक के ‘मशीन लर्निंग’ और ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थ्योरी’ विषयों के थे। ये दोनों विषय इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए काफी जटिल माने जाते हैं। परीक्षा शुरू होने से कई घंटे पहले ही इन विषयों के पूरे प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचा दिए गए थे।
प्रशासन ने पेपर लीक की पुष्टि होते ही दोनों विषयों की परीक्षाएं तुरंत निरस्त कर दी थीं। अब इन दोनों विषयों के लिए नए सिरे से प्रश्नपत्र तैयार किए जा रहे हैं। छात्रों को दोबारा परीक्षा केंद्र जाना होगा। नई तारीखों का ऐलान एक या दो दिन में किया जाएगा।
विवि ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई एक उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की है। समिति ने अपनी प्राथमिक जांच में परीक्षा व्यवस्था में भारी खामियां पाई थीं। परीक्षा व्यवस्था की पूरी जवाबदेही तय करते हुए ही वीके पटेल पर गाज गिरी है।
इस पूरे पेपर लीक कांड ने उत्तराखंड की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की साख को गहरा धक्का पहुंचाया है। विवि प्रशासन लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
दोषियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने पुरानी परीक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। सुरक्षा के नए मानक लागू करने की तैयारी चल रही है।
इस पेपर लीक का सीधा असर प्रदेश के कई नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों पर पड़ा है। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज भीमताल, तुलाज इंस्टीट्यूट और बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान द्वाराहाट के सैकड़ों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इन छात्रों को अब नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी।
रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग देहरादून और जयराम भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून के छात्र भी इस निरस्त हुई परीक्षा का हिस्सा थे। इन कॉलेजों के प्रबंधन ने विवि से जल्द नई तारीखें जारी करने की मांग उठाई है।
माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून और टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी टिहरी के परीक्षार्थी भी असमंजस की स्थिति में हैं। इन संस्थानों के बीटेक छात्रों का निर्धारित शैक्षणिक शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया है।
नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़, वूमेंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून और इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोपेश्वर को भी नई परीक्षा व्यवस्था के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इन सुदूर इलाकों के छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा देने आना भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बनेगा।









