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Ankita Bhandari Case : दुष्यंत गौतम के राज्यपाल बनने पर भड़की उत्तराखंड कांग्रेस, लगाया जांच से बचाने का आरोप

अंकिता भंडारी केस में दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ देहरादून में कांग्रेस का मौन सत्याग्रह। जांच से बचाने के लगाए गंभीर आरोप।

देहरादून (13 अक्टूबर 2026) : अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Case) में कथित वीवीआईपी की भूमिका को लेकर घिरे भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले ने उत्तराखंड की सियासत में नया उबाल ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस नियुक्ति को कानूनी शिकंजे से बचने के लिए संवैधानिक पद का कवच देने का प्रयास करार दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में मंगलवार को पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने देहरादून के ऐतिहासिक गांधी पार्क में मौन उपवास रखकर केंद्र सरकार के फैसले का तीखा विरोध किया और प्रकरण की सीबीआई जांच में तेजी लाने की मांग उठाई।

संवैधानिक पद देकर जांच रोकने का सीधा आरोप

गांधी पार्क में सत्याग्रह के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि अंकिता भंडारी केस में जिस वीवीआईपी की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, उसकी निष्पक्ष जांच से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि भविष्य में कोई भी जांच एजेंसी या अगली सरकार इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई कर सके, इसलिए दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बिठाकर कानूनी संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों की एक मर्यादा होती है और गंभीर आरोपों के बीच ऐसी नियुक्ति पर केंद्र सरकार को तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।

अंकिता भंडारी केस में वीवीआईपी नाम का विवाद

अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुरुआत से ही रिजॉर्ट में आने वाले एक कथित वीवीआईपी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार ने जनता के आक्रोश के बाद निष्पक्ष सीबीआई जांच की बात कही थी, लेकिन धरातल पर जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता का संरक्षण किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं बना सकता, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।

विरोध प्रदर्शन में प्रदेश संगठन महामंत्री राजेंद्र भंडारी, राजीव महर्षि, पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा और अभिनव थापर सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वीवीआईपी का सच सामने नहीं आता, तब तक जनता के सवालों का जवाब अधूरा रहेगा।

सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने का ऐलान

मौन उपवास के दौरान कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि वे इस विवाद को केवल प्रेस बयानों तक सीमित नहीं रखेंगे। गणेश गोदियाल ने ऐलान किया कि अंकिता भंडारी पूरे उत्तराखंड की बेटी थी और उसे न्याय दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि गांधीवादी तरीके से शुरू हुआ यह सत्याग्रह आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा। पार्टी ने मांग की है कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे और जनता के मन में उठ रहे संदेह को दूर करने के लिए पूरे मामले की पारदर्शी न्यायिक व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे।

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