देहरादून, 5 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Yamunotri Highway Landslide : पर्यटन सीजन का अंतिम दौर होने के बावजूद मसूरी में जाम की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। शनिवार को वीकेंड के मौके पर मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग पर करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया जिसमें सैकड़ों वाहन घंटों रेंगते नजर आए।
भगत सिंह चौक, मालरोड और मसूरी-कैंपटी मार्ग पर लंबे समय तक यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही। स्कूली बच्चों, मरीजों और पर्यटकों को इस भीषण जाम के कारण सड़क पर ही अपना कीमती समय गुजारना पड़ा। स्थानीय निवासियों का रोजमर्रा का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बने खातीगांव-नरगोली मोटर मार्ग की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो चुकी है। 27 जून को इस सड़क पर बना कलमठ पूरी तरह ध्वस्त हो गया था और आज सात दिन बीत जाने के बाद भी संबंधित विभाग यहां यातायात बहाल नहीं कर सका है।
बेरीनाग पहुंचने के लिए ग्रामीणों को अब 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी नापनी पड़ रही है। चंतोला, नरगोली, ठांगा, भंडारीगांव, देवलेत, तुषरेड़ा, औलानी, देवतोली, ढानण, बगराटी और सिमायल समेत दर्जनों गांवों का अपनी तहसील और जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट चुका है।
पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। कुपड़ा खड्ड और यमुना नदी के संगम स्थल पर भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है जिससे नदी का प्रवाह बेहद संकरा हो गया है।
पानी का बहाव रुक-रुककर आगे बढ़ रहा है जिसने आपदा प्रभावित स्याना चट्टी के लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर आपदा ने भारी तबाही मचाई थी और अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
यमुनोत्री हाईवे पर स्याना चट्टी के पास शनिवार सुबह अचानक भारी भूस्खलन होने से पूरा यातायात ठप पड़ गया। सुबह करीब 10 बजे पहाड़ी से गिरे मलबे ने यमुनोत्री धाम जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं का रास्ता रोक दिया।
मार्ग को साफ करने में मशीनरी जुटी रही और शाम सात बजे जाकर यह हाईवे केवल छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए बमुश्किल खोला जा सका। दिनेश राणा, शैलेंद्र राणा, बलदेव सिंह, जयपाल सिंह और चित्र मोहन सिंह जैसे स्थानीय निवासियों ने इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर हाईवे निर्माण एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि स्यानाचट्टी में हाईवे चौड़ीकरण के दौरान मशीनों से किए गए अनियंत्रित कटान ने पूरे पहाड़ को दरका दिया है। इसी अवैज्ञानिक कटान के कारण हाईवे अब लगातार भूस्खलन की चपेट में आ रहा है और राहगीरों की जान सीधे जोखिम में पड़ी है।









